नशा छोड़कर जीवन बेहतर बनाने का संदेश देते हैं शक्तिपुत्र महाराज

बिलासपुर के साइंस कॉलेज मैदान में भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा आयोजित 128 वें शक्ति चेतना जनजागरण शिविर में योगिराज शक्तिपुत्र जी महाराज ने हज़ारों की संख्या में मौजूद अपने अनुयायियों को नशा छोड़ने का संकल्प दिलवाया।
भागवत कथा सुनने से मुक्ति नहीं मिलती
प्रवचन के दौरान शक्तिपुत्र जी महाराज ने कहा कि कथावाचकों से पूछो कि क्या उनको मुक्ति मिल गई? वे स्वयं रत्न जड़ित अंगूठियां पहने रहते हैं। आपको अपने ईष्ट पर अटूट निष्ठा विश्वास रखना होगा तभी आपकी साधना का लाभ आपको मिल पाएगा। कथाएं सुनने में बुराई नहीं है पर उनको अपने जीवन में धारण भी करना है। अपने विचारों को निरर्थक चीजों से दूर रखो। इससे हमारी सतोगुड़ी कोशिकाएं काम करने लगेंगी।
पूरा समाज हमारा परिवार है
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में इतनी भ्रांतियां कभी नहीं थीं जितनी आज हैं। हमने कुछ जातियों को नज़रअंदाज़ कर उनको धर्म का ज्ञान देना बंद कर दिया। हमारा सनातन खंड खंड होता जा रहा है। जो इंसान इंसान में भेद करता है उसे कभी किसी ईष्ट कोई कृपा नहीं मिलती।
किसी धर्मगुरु की कुंडलिनी चेतना जागृत नहीं
उन्होंने कहा हमारे एक भी शंकराचार्यों की और धर्मगद्दियों पर बैठे हुए धर्माधिकारिओं में किसी की भी कुंडलिनी चेतना जागृत नहीं है। मैंने चुनौती दी थी उनको जो खुद को त्रिकालदर्शी बताते हैं और परचा बनाते हैं कि तीनों प्रदेशों में होने वाले विधानसभा चुनावों में किसकी सरकार बनेगी तो किसी के पास यह देख पाने की क्षमता नहीं थी और कुछ के जो जवाब पत्र मिले उनमे सबमें गलत जवाब थे तो अब उन्हें अपनी दुकाने अब बन कर देनी चाहिए।
हम हिंसा को बढ़ावा नहीं देते
एक धर्म गुरु होने के नाते मेरा कर्तव्य है गलत का विरोध करूँ। आजादी के बाद देश के टुकड़े धर्म के नाम पर ही हुए थे। राम इसलिए श्रेष्ठ हैं क्योंकि इस धरती पर रहते हुए जैसा जीवन उन्होंने जिया है वैसा किसी ने नहीं जिया। आज समाज धर्म और कर्म से विमुख होता जा रहा था। ये माँ का युग है जब देवताओं पर भी विपत्ति आती है तो वो भी माँ आदिशक्ति को पुकारते हैं। केवल एक मार्ग है साधना का पथ जिससे मानवता को दिशा दी जा सकती है। नशे-मांश की ओर युवा बढ़ता जा रहा है सुख और उपभोग को जीवन का लक्ष्य बना कर जीवन जीता जा रहा है ।
अंत में चिन्तनों को समाप्त करते हुए परमहंस योगिराज श्री शक्तिपुत्र योगीराज शक्तिपुत्र महाराज ने भक्तों के दोनों हाथ ऊपर उठवाकर संकल्प दिलवाया कि वह नशे मांस से मुक्त चरित्रवानों का जीवन जीते हुए धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा और मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।